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Friday, March 1, 2013

गीत अमीर खुसरो


गीत अमीर खुसरो 


 चल खुसरो घर आपने

खुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पियो को, दोउ भए एक रंग।।

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।

खीर पकायी जतन से, चरखा दिया जला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।

गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, सांझ भयी चहु देस।।

खुसरो मौला के रुठते, पीर के सरने जाय।
कहे खुसरो पीर के रुठते, मौला नहिं होत सहाय।।

 बहुत कठिन है डगर पनघट की 

बहुत कठिन है डगर पनघट की
कैसे मैं भर लाऊं मधवा से मटकी
पनिया भरन को मैं जो गई थी
दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी?
खुसरो निजाम के बल बल जइये
लाज रखो मोरे घूंघट पट की