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Tuesday, February 25, 2014

जिंदगी


जिंदगी


चक्र समय का 


चलता है अनवरत


लोग बिछुड़ जाते हैं


रह जाती हैं स्मृतियाँ


लेकिन जीवन रुकता नहीं


मिल जाते है नये लक्ष्य


नवीन प्रेरणा, नये संकल्प


नयी सृष्टि, नयी दृष्टि


नया सृजन, नया जीवन


और हम  बढ़ जाते हैँ
     
   अपने  कर्मपथ पर 

पुन: खो जाते है दुनिया की भीड़ में


शायद इसी का नाम जिंदगी है।

            
                --------  मनोज मिश्र