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Saturday, August 11, 2018


कदम कदम कर बढ़ते जाना 


है आसान बनाना रिश्ते , लेकिन कठिन निभाना
सोच समझ कर ही रिश्तों की , खातिर हाथ बढ़ाना ।। 
जीवन की नैया खेना भी , तो आसान नहीं है
आँधी तूफ़ानों मझधारों , से भी है टकराना ।।
सर पर लिये याद की गठरी , भटक रहे जीवन में
यत्न किया पर नहीं छूटती , मुश्किल भार उठाना ।। 
जीवन जोगी वाला डेरा , कहते चलो कहानी
किन्तु कभी यह भूल न जाये , प्रभु को मुख दिखलाना ।। 
दुख न किसी का बाँटा जग में , अश्रु नहीं यदि पोंछे
कौन पंथ दिखलाये तुम को , कहीं भटक मत जाना ।। 
लालच में पड़ लोभ मोह के , पत्थर बहुत समेटे
ये ही लगे दबाने अब तो , दूभर कदम बढ़ाना ।। 
कदम कदम कर बढ़ते जाना , रब का नाम न भूले
कर्म न करना ऐसे जिन से , हो पीछे पछताना ।। 

                ------------ डॉ. रंजना वर्मा