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Saturday, November 24, 2012

सच्चे शिक्षक - गिजुभाई

सच्चे शिक्षक

    गिजुभाई एक सच्चे शिक्षक थे। वे जैसे स्वयं थे, उसी के अनुरुप वे भारत के शिक्षक की प्रतिमा का निर्माण करने के मिशन में निमग्न थे। शिक्षक आत्मसात करे बालक के व्यक्तित्व की स्वतंत्र अभिव्यक्ति को, आत्मगौरव प्राप्त करे बालक-बालिका के गौरव की सुरक्षा और उसके विकास में, अपने स्वातंन्न्य की अनुभूति करे उसकी स्वाधीनता अथवा उसके स्वावलम्बन की प्रवृत्ति को सजाने-संवारने में, और स्वयं का नियमन करे उसको सहज रुप से स्वयमेव नियमित करने में। जिस वातावरण की पृष्ठभूमि जाॅन लाक, रुसो, पेस्टालाॅजी, फ्रोबेल और टाॅलस्टाय ने तैयार की थी और जिसे मेरिया माण्टेसरी ने एक वैज्ञानिक नवाचार दिया; उसे भारतीय धरती पर संकल्पबद्ध होकर गिजुभाई ने विकसित किया। वे एक ऐसे अनुपम भारतीय बाल शिक्षाप्रज्ञ थे जो बालशिक्षण को किसी चैखटे तक ही सीमित नहीं रखना चाहते थे, बल्कि उसे सामाजिक पुनर्रचना के माध्यम के रुप में प्रयोग करना चाहते थे।
    गिजुभाई ने शिक्षक के रुप में एक कठिन काम कर के दिखा दिया। वह काम है- बालकों को डराए-धमकाए बिना प्यार से पढ़ाना और अनुशासित रखना इस सिद्धान्त को गिजुभाई की शिक्षा जगत को देन कहना समीचीन होगा।